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रविवार, 3 मार्च 2013

मर्यादाओं का ध्यान रखकर होली की परंपराओं को निभाएं।

होली का लोकप्रिय सूत्र वाक्य है - बुरा न मानो होली है। इस नारे की सार्थकता तभी है, जब हम दूसरों की भावनाओं का सम्मान कर एवं मर्यादाओं का ध्यान रखकर होली की परंपराओं को निभाएं। अन्यथा इस पर्व और संबंधों की मिठास, खटास में बदलने में देर नहीं लगती। अत: कुछ ऐसी बातें जिनको अपनाकर इस त्योहार पर रंग में भंग जैसी स्थिति बनने से बचा जा सकता है।

- रासायनिक पदार्थों से बने रंगों जैसे पेंट, वार्निश या अन्य रंगों के उपयोग से बचें। यह त्वचा और आंखों को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। इनके स्थान पर अबीर, गुलाल, टेसु के फूलों का रंग के रूप में उपयोग करें।
- कीचड़, मलबा या अन्य मलीन पदार्थों का उपयोग न करें।

- शराब, भांग या अन्य किसी प्रकार के नशे का सेवन कर होली न खेलें। क्योंकि यह त्योहार है होश में आने का न कि होश गंवाने का।


- होली की परंपरा नृत्य, गायन, वादन प्रधान है। किंतु अति उत्साह में इन गतिविधियों से किसी के साथ अशालीनता, अभद्रता और अपशब्दों के प्रयोग से सामाजिक, पारिवारिक संबंधों की मर्यादा का हनन न होने दें।
- गुब्बारों के प्रयोग से बचें। इनसे चेहरें या शरीर के अन्य कमजोर अंगों को हानि पहुंच सकती है।

- बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ होली खेलते समय उनके प्रति सम्मान और स्नेह के भाव रखें।

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